हमारे प्राचीन धनुष की गाथा और जाने दिव्य धनुषों के बार में, किस योद्धा के पास कौन सा धनुष था

सोशल मीडिया पर एक मैसेज प्रसारित हो रहा है जिसमें महर्षि दधिची की अस्थियों से तीन धनुष पिनाक, शांर्डग्य (शारंग) और गांडिव के बनने की बात कही जा रही है। इस भ्रामक पोस्ट को पढ़कर ही विचार आया कि हमारे पौराणिक आयुधों पर लिखा जाए। महर्षि दधिची की अस्थियों से केवल वज्र का निर्माण हुआ था जिसे देवराज इंद्र को दिया गया था। पिनाक, शांर्डग्य और गाण्डीव का निर्माण समाधिस्थ महर्षि कण्व की मूर्धा पर उगे बांस से हुआ जिसका निर्माण भगवान विश्वकर्मा ने किया था। जिन्हे क्रमशः आदिधनुर्धर महादेव, पालनकर्ता भगवान विष्णु और सृष्टि रचयिता भगवान ब्रह्मा को अर्पण किया गया। कालांतर में यह तीनों धनुष अलग अलग योद्धाओं द्वारा प्रयोग किये गए। सोशल मीडिया पर प्रसारित उस लेख में भीमपुत्र घटोत्कच का वध कर्ण द्वारा इंद्र से प्राप्त वज्र से होना बताया गया है, जो कि असत्य है। दानवीर कर्ण ने इंद्रदेव की आराधना कर उनसे अमोघ अस्त्र प्राप्त किया था ना कि वज्र। घटोत्कच के वध का प्रसंग पढ़ने पर जानकारी मिलती है कि घटोत्कच जब कौरव सेना का संहार कर रहा था तब दुर्योधन के कहने पर कर्ण ने इसी अमोघ अस्त्र से घटोत्कच का वध किया था। सोशल मीडिया पर ऐसे भ्रामक लेख प्रसारित होना कोई नई बात नहीं है। कुछ अज्ञानी अथवा अल्पज्ञानी लोग आधी अधूरी बातें पढ़कर आधी बात मन से जोड़कर लेख लिख देते हैं। कर्ण के अमोघ अस्त्र, कर्ण के धनुष विजय और इंद्रदेव के वज्र तीनों का संबंध देवराज इंद्र से था, शायद इसी की आधी अधूरी जानकारी के साथ वह लेख तैय्यार कर दिया गया। वज्र शस्त्र श्रेणी का आयुध है जबकि धनुष से अस्त्र श्रेणी के आयुध छोड़े जाते हैं। इन दोनों में सामान्य सा अंतर है अस्त्र किसी यंत्र के द्वारा चलाए जाते हैं जैसे धनुष से बाण चलाया जाता है। जबकि शस्त्र को तलवार की तरह हाथ में पकड़कर या हाथ से फेंककर वार किया जाता है। इस लेख में हमारे दिव्य धनुषों के बार में लिखता हूँ, किस योद्धा के पास कौन सा धनुष था।

  1. पिनाक धनुष शिव जी को अर्पित किया गया था। पिनाक को अजगव भी कहा गया है। शिव जी के पास और भी कई धनुष थे। त्रिपुरांतक धनुष से उन्होंने मयासुर द्वारा बनाए त्रिपुर को नष्ट किया था। शिव जी के पास रुद्र नामक एक और धनुष का उल्लेख मिलता है जिसे बाद में भगवान बलराम ने प्राप्त किया था।
  2. शांर्डग्य (शारंग) धनुष विष्णु जी को अर्पित किया गया था जिसे उन्होंने धारण किया। इसे शर्ख के नाम से भी जाना गया। यह धनुष भगवान परशुराम और योगेश्वर श्री कृष्ण ने प्राप्त किया था।
  3. भगवान ब्रह्मा को गांडिव धनुष अर्पित किया गया था। जिसे अग्निदेव, दैत्यराज वृषपर्वा और अंत में सव्यसांची अर्जुन ने प्राप्त किया।
  4. भगवान परशुराम के पास अनेक धनुष थे। उन्होंने अपने गुरु महादेव से पिनाक, भगवान विष्णु से शांर्डग्य (शारंग) और देवराज इंद्र से विजय नामक धनुष प्राप्त किया था। यह विजय धनुष उन्होंने अपने शिष्य कर्ण को दिया था।
  5. भगवान राम जिस धनुष को धारण करते थे उसका नाम कोदण्ड था। रामचरित मानस में प्रभु के धनुष को सारंग भी कहा गया है, परंतु वह धनुष शब्द का पर्यायवाची शब्द सारंग है ना कि विष्णु जी का धनुष शांर्डग्य।
  6. रावण के पास पौलत्स्य नामक धनुष था। जिसे द्वापर युग में घटोत्कच ने प्राप्त किया था। एक समय पर रावण ने शिव जी से पिनाक भी प्राप्त किया था, परंतु उसे धारण नहीं कर पाया।
  7. योगेश्वर श्री कृष्ण का मुख्य आयुध सुदर्शन चक्र था परंतु उन्होंने भी शांर्डग्य (शारंग) धनुष को धारण किया था।
  8. भगवान बलराम के धनुष का नाम रुद्र था जो उन्होने भगवान शिव से प्राप्त किया था।
  9. भगवान कार्तिकेय ने अपने पिता भगवान शिव के धनुष पिनाक को धारण किया था।
  10. देवराज इंद्र ने विजय नामक धनुष को धारण किया जिसे उन्होंने भगवान परशुराम जी को दे दिया।
  11. कामदेव ने ईख (गन्ने) की छड़ी पर मधुमक्खी के तार से बनी प्रत्यंचा से तैय्यार पुष्पधनु नामक धनुष को धारण किया था।
  12. युधिष्ठिर ने महेंद्र नामक धनुष को धारण किया था।
  13. भीमसेन ने वायुदेव से प्राप्त वायव्य धनुष को धारण किया था।
  14. अर्जुन ने ब्रह्मा जी के धनुष गांडिव को धारण किया था। जिसे उसने खांडवप्रस्थ में मयदानव से प्राप्त किया था।
  15. नकुल ने भगवान विष्णु से प्राप्त वैष्णव धनुष को धारण किया था।
  16. सहदेव ने अश्विनी कुमारों से प्राप्त अश्विनी नामक धनुष को धारण किया था।
  17. कर्ण ने अपने गुरु भगवान परशुराम से देवराज इंद्र का विजय धनुष प्राप्त किया था।
  18. अभिमन्यु ने अपने गुरु और मामा भगवान बलराम से भगवान शिव का धनुष रुद्र प्राप्त किया था।
  19. घटोत्कच ने लंकापति रावण का धनुष पौलत्स्य प्राप्त किया।
  20. युधिष्ठिर के पुत्र प्रतिविंध्य ने रौद्र नामक धनुष का प्रयोग किया।
  21. भीमसेन के पुत्र सूतसोम ने आग्नेय नामक धनुष प्राप्त किया।
  22. अर्जुन के पुत्र श्रुतकर्मा ने कावेरी नामक धनुष का प्रयोग किया।
  23. नकुल के पुत्र शतनिक ने यम्या नामक धनुष का प्रयोग किया।
  24. सहदेव के पुत्र श्रुतसेन ने गिरिषा नामक धनुष का प्रयोग किया
  25. आचार्य द्रोण ने महर्षि अंगिरस से प्राप्त आंगिरस धनुष का प्रयोग किया गया

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