माता गौरी को तृतीय तिथि की अधिष्ठात्री देवी कहा गया है इसलिए तीज के दिन सौभाग्यदायिनी माता गौरी की पूजा ज़रूर की जाती है। चाहे वो गणगौर पूजा हो या हरितालिका तीज, सौभाग्वती स्त्रियों के ये त्योहार तृतीया के महत्व को बताते हैं। अगर आपके यहाँ व्रत करने का विधान न भी हो तो हरतालिका तीज के दिन "गौरी शंकर" यानि शिवपरिवार का पूजन अवश्य करना चाहिए।
धर्मसिंधु के अनुसार
इस दिन माता पार्वती के पीले वस्त्रों में कमलासन पर बैठी हुई, स्वर्ण के समान आभा वाले स्वरूप का ध्यान करना चाहिए। हल्दी, कुमकुम, सिंदूर, काजल आदि सौभाग्य सामग्री से,बकुल, चंपक गुलाब कमल पुन्नाग करवीर/कनेर और रसाल के फूलों से, बिल्वपत्र, प्रवाल, तुलसीदल, मालती आदि पत्रों से अर्चन कर सकते हैं। आप सौभाग्य सामाग्री मतलब चूड़ी, बिंदी, आलता, सिंदूर, मेंहदी आदि 16 श्रृंगार की सामग्री से माता का पूजन अर्चन करें, जितना संभव हो 27/108/1008 की गिनती से कोई भी ऊपर कहे पत्र, पुष्प या सौभाग्य सामग्री से आप माता का अर्चन करके, उन्हें दक्षिणा के साथ सौभाग्वती स्त्रियों को दान दें, साथ में फल मिठाईयां जो भी संभव हो करें। वैसे तो हरितालिका तीज का व्रत बहुत विधिविधान और भव्य तरीके से मनाया जाता है पर आप जहां रहते हैं वहां उपलब्धता और आपकी जॉब आदि के साथ सामंजस्य करके, हृदय से माता से प्रार्थना करें। मातेश्वरी हम सबके सौभाग्य श्रृंगार और परिवार की वृद्धि करें और रक्षा करें


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