बलिदान के पुष्प

सन् 1707 में ईस्ट इण्डिया कंपनी का छत्र धारण कर अंग्रेज़ों ने भारत की धरती पर अपने पाँव पसारे। इस देश की धन-संपदा जहाजों में लादकर इंग्लैंड ले गए, यहाँ की संस्कृति को नष्ट किया, महिलाओं के साथ अनिष्ट अनाचार किए, बलात् धर्मपरिवर्तन किया, किसानों को लगान के बोझ से दबोच दिया, बुनकरों के हाथ काट डाले, मजदूरों के गले घोंट दिये और हम भारतीयों को अपना गुलाम बना लिया। आखिर लावा फूट पड़ा, भावनाएं उमड़ पड़ीं, जनाक्रोश जागृत होने लगा। सब मिल कर एक स्वर में बोल उठे 'मारो फिरंगी को'। देखते-देखते यह उद्घोष वास्तव में 1857 की देशव्यापी गूँज बन गया। परिणाम स्वरूप लाखों लाख लोगों ने, वीरों ने शहीदों ने भारत को स्वतंत्र कराने के लिए 90 साल तक सतत् संघर्ष जारी रखा। अन्ततोगत्वा 15 अगस्त, 1947 को देश आजाद हुआ।
आओ हम सब मिलकर स्मरण करें, उन वीरों को, उन शहीदों को, उन हुतात्माओं को जिन्होंने हँसते-हँसते मृत्यु का आलिंगन किया। साथ ही हम स्मरण करें उन माताओं को जिन्होंने अपने लाड़ले सपूतों को खो दिया, उन सुहागिनों को जिनकी माँग सूनी हो गई, उन बहनों को जो हाथ में राखी लिए भाई के आने का इंतजार करती रह गईं, उन अबोध ननमुँहों को जो हमेशा-हमेशा के लिए अनाथ हो गए।
यह कहना अर्धसत्य है कि आजादी केवल अहिंसा या केवल क्रांति से मिली। गांधी जी के नेतृत्व में चले अहिंसक आंदोलनों ने देशवासियों के मनों में स्वतंत्रता की इच्छा पैदा की और जनसाधारण स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा वहीं क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों के मनों में भय भर दिया। इंग्लैंड के प्रधानमंत्री एटली ने संसद में कहा कि अब हम भारतीय सेनाओं की निष्ठा पर भरोसा नहीं कर सकते और हिन्दुस्तान पर बलपूर्वक शासन करना घाटे का सौदा है। अतः अब उसे स्वाधीन तो करना ही है। शक्ति के बिना भगवान शिव भी शव हैं। उस शक्ति का प्रदर्शन हमारे क्रान्तिवीरों ने किया। उनकी वीर गाथाएँ लिखने का एकमात्र उद्देश्य यही है कि उन्हें पढ़कर हमारे किशोर एवं युवक बलिष्ठ, साहसी, निडर, परोपकारी, सहृदय, बलिदानी वीर बनें जिससे इतने प्रयत्नों और बलिदानों के बाद मिली स्वतंत्रता को स्थायित्व प्राप्त हो सके।
देशभक्ति का अर्थ केवल देश के लिए मरना ही नहीं बल्कि देश के लिए जीना भी है। हम सौभाग्यशाली हैं कि हमें गुलामी के दुरुह दिन नहीं देखने पड़े परंतु इसका अर्थ यह नहीं कि देशभक्ति का हमारे जीवन में कोई अर्थ नहीं। जिस तरह हमारे क्रांतिकारी देश के लिए बलिदान हुए हम उसी भावना से अपना सर्वस्व देश के विकास, यहां के निवासियों की सेवा, माँ भारती की रक्षा में अर्पित करें।

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