श्री गोगा जाहरवीर जी; जिनके नाम लेने से ही दूर चले जाते हैं साँप

Goga Jaharveer

क्या आपको पता है किसी भी तरह का साँप कहीं दिख जाए या आपको हानि पहुंचाने की कोशिश करे तो बस उसे गोगा जाहरवीर की शपथ/आन देकर वहां से जाने या रुक जाने को कह दीजिये। सांप चला जाता है या स्तम्भित हो जाता है, भक्त सांप से संबंधित खतरों से बचने के लिए उनका आशीर्वाद मांगते हैं। गोरखनाथ जी के प्रमुख शिष्यों में से एक थे। राजस्थान के छह सिद्धों में गोगाजी का प्रमुख स्थान है। ऐसा माना जाता है की अगर किसी के घर में सांप निकले तो गोगाजी को कच्चे दूध का छिटा लगा दें इससे सांप बिना नुकसान पहुंचाए चला जाता हैं। जिस घर में गोगा जी की पूजा होती हैं उस घर के लोगो को सांप नहीं काटता है गोगाजी पूरे परिवार की रक्षा करते हैं। बहुत सारे ऐसे लोककल्याण के यंत्र/मंत्र/ शाबर मंत्र आदि चलन में हैं जो गोगा जाहरवीर जी की आन पर बने हैं और इनका सांपों के ज़हर को उतारने और उनको दूर भगाने के लिए गांव देहात में आज भी प्रयोग होता है।
गोगाजी जाहर वीर जी को गुग्गा वीर, जाहिर वीर, राजा मण्डलिक व जाहर पीर के नाम से भी जानते हैं। उनका जन्म विक्रम संवत 1003 में राजस्थान के चुरू जिले के दत्तखेड़ा गांव में हुआ था। यह ददरेवा में स्थित है जहां पर सभी धर्म और सम्प्रदाय के लोग मत्था टेकने के लिए दूर-दूर से आते हैं। कायम खानी मुस्लिम समाज उनको जाहर पीर के नाम से पुकारते हैं।
महमूद गजनवी के साथ युद्ध में गोगा जी वीरता पूर्वक सतलज के मार्ग की रक्षा कर रहे थे। इसी युद्ध में गोगा जी अपने बेटों के साथ शहीद हो गए, कहते हैं युद्ध करते समय गोगा जी का सर ददरेवा (चुरू) में गिरा इसलिए इन्हें शीर्षमेडी (शीषमेडी) तथा धड़ नोहर (हनुमानगढ़) में गिरा इसलिए धरमेडी/धुरमेडी व गोगामेडी भी कहते है। कुछ जगह उनके गोगामेड़ी से अपने घोड़े सहित जमीन में समाकर पाताल जाने की बात भी कही गयी है, कहीं कहीं उन्हें जन्मेजय भी कहा गया है।

कौन हैं कायमखानी चौहान मुस्लिम?

गोगा जी के वंशज मोटा राव के पुत्र कर्म सिंह उर्फ़ कायम खां फीरोज तुग़लक (1309-1388) के समय में मुसलमान बने इसके पीछे भी एक अलग कहानी है, सत्य ये है कि उनके तेहरवे वंशधर कर्मसी(कर्मचन्द) जो उस समय बालक थे को जंगल मे से दिल्ली के फिरोजशाह तुगलक(1351–1388) उठाकर ले गया था । फिरोजशाह ने उसे जबरदस्ती मुसलमान बनाकर अपनी पुत्री उससे ब्याह दी और उसका नाम कायंम खान रख दिया और बाद मे ये ही कायंम खान बहलोल लोदी के शासनकाल मे हिसार का नवाब बना था इसी कायम खां के वंशज कायम खानी चौहान (मुसलमान) कहलाए और ये अभी भी गौगा जी की पूजा करते है। कायम खां यद्यपि धर्म परिवर्तन कर मुसलमन हो गये थे पर उसके हिन्दू संस्कार प्रबल थे। उनका संपर्क अपने जन्म स्थान के आसपास की शासक जातियों से भी बना रहा था।



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